Shabnam Parveen
Fantasy
आपकी याद आती रही रात भर
शबनमी आंखें मुस्कुराती रही रात भर।
रात भर दर्द का चिराग़ जलता रहा
ग़म की लाॅ थरथरती रही रात भर।
यादो की शमा जलती रही
शमा की रोशनी जगमगाती रही रात भर।
कई लहरें उठती रही
कई मौजें साहिल से टकराती रही रात भर।
मेरी याद में
अजनबी
रात भर
हमारी कहानी
जीवन एक सागर
मेरा बचपन
तेरा इंतज़ार
तुम्हारे होने से ही मन में सुकून और चेहरे में नूर है तुम्हारे होने से ही मन में सुकून और चेहरे में नूर है
पुष्प सुगंध प्रकृति के रंग में चार चांद है। पुष्प सुगंध प्रकृति के रंग में चार चांद है।
वो आयेंगे कभी ये सोच कर दबी दबी सी खुशी आती है वो आयेंगे कभी ये सोच कर दबी दबी सी खुशी आती है
जिन्दगी बीत रही थी अनचाहे कशमकश में कि मेरी राहों को तेरी राहों से दूर जाना था जिन्दगी बीत रही थी अनचाहे कशमकश में कि मेरी राहों को तेरी राहों से दूर जाना थ...
घंटों करती है बातें, इतना कुछ कहना है मुझको ... घंटों करती है बातें, इतना कुछ कहना है मुझको ...
कवियों और लेखकों की बदौलत तो दुनिया चलती है। कवियों और लेखकों की बदौलत तो दुनिया चलती है।
लेकिन एक बचपन मेरे साथ है मेरी बेटी मेरे पास है लेकिन एक बचपन मेरे साथ है मेरी बेटी मेरे पास है
अपनी मर्जी से आता जाता है बड़ा शरारती है "बैरी चाँद"। अपनी मर्जी से आता जाता है बड़ा शरारती है "बैरी चाँद"।
चूड़ी की खनखन न सुहाये हर पल बाट निहारूँ हारी अब तो मैं हारी, चूड़ी की खनखन न सुहाये हर पल बाट निहारूँ हारी अब तो मैं हारी,
मैं नीले गहरे समुद्र में गहराइयों से भी परे डूब जाना चाहती हूं। मैं नीले गहरे समुद्र में गहराइयों से भी परे डूब जाना चाहती हूं।
अगर ज़िन्दगी एक किताब है तो मेरा फेवरेट चैप्टर हो तुम! अगर ज़िन्दगी एक किताब है तो मेरा फेवरेट चैप्टर हो तुम!
कभी गुस्से में खुद ही दबा देती है, कभी रो रो कर धुंधला देती है। कभी गुस्से में खुद ही दबा देती है, कभी रो रो कर धुंधला देती है।
इठलाना, शरमाना तुझे कैद करने की मेरे दिल में छोटी सी जगह थी इठलाना, शरमाना तुझे कैद करने की मेरे दिल में छोटी सी जगह थी
लम्हा भी क्या जैसे एक दिन जैसे एक महीना जैसे एक साल जैसे एक सदी और लम्हा भी क्या जैसे एक दिन जैसे एक महीना जैसे एक साल जैसे एक सदी और
पत्थरों से मुझे न है, कोई गिला पत्थरों के बाजार में बिकता कहाँ है आईना, पत्थरों से मुझे न है, कोई गिला पत्थरों के बाजार में बिकता कहाँ है आईना,
टूटे कई रिश्ते-नाते...बिछड़ गए कुछ अपने अश्क न सही आँखों में, दिल परेशाँ तो है टूटे कई रिश्ते-नाते...बिछड़ गए कुछ अपने अश्क न सही आँखों में, दिल परेशाँ तो है
जीवन की डगर है बड़ी पतझड़ न आए कभी जीवन की डगर है बड़ी पतझड़ न आए कभी
नीले सिंदूरी अंबर पर क्षितिज के उस छोर को तकना चाहती हूं नीले सिंदूरी अंबर पर क्षितिज के उस छोर को तकना चाहती हूं
हर रोज़ होता है बेकरार दिल मेरा , तू कहां खो गया है, ये लम्हे ख्वाबों को भी धुंधला करें हर रोज़ होता है बेकरार दिल मेरा , तू कहां खो गया है, ये लम्हे ख्वाबों को भी धु...
चाह नहीं पतंग की ऊंचाई पा जाऊँ अपनी डोर गैरों के हाथ पकड़ाऊं चाह नहीं पतंग की ऊंचाई पा जाऊँ अपनी डोर गैरों के हाथ पकड़ाऊं