Shabnam Parveen
Fantasy
आपकी याद आती रही रात भर
शबनमी आंखें मुस्कुराती रही रात भर।
रात भर दर्द का चिराग़ जलता रहा
ग़म की लाॅ थरथरती रही रात भर।
यादो की शमा जलती रही
शमा की रोशनी जगमगाती रही रात भर।
कई लहरें उठती रही
कई मौजें साहिल से टकराती रही रात भर।
मेरी याद में
अजनबी
रात भर
हमारी कहानी
जीवन एक सागर
मेरा बचपन
तेरा इंतज़ार
मैं इस मन को यहीं, कहती रहतीं हूं कहीं. मैं इस मन को यहीं, कहती रहतीं हूं कहीं.
आंचल में अपने आज भी जान नहीं पाया कोई आंचल में अपने आज भी जान नहीं पाया कोई
जिसमें बस मेरे मधुसूदन हों.. हर क्षण अर्पण कर दिया हैं, जिसमें बस मेरे मधुसूदन हों.. हर क्षण अर्पण कर दिया हैं,
उदास ह्रदय में खुशी का प्रकाश प्रदीप्त कर दो ! उदास ह्रदय में खुशी का प्रकाश प्रदीप्त कर दो !
उजास फैलाती दीपावली, लेकर आई भाईदूज, उजास फैलाती दीपावली, लेकर आई भाईदूज,
दे दी उसने मुझे सारे जमाने की प्यार की दौलत, दे दी उसने मुझे सारे जमाने की प्यार की दौलत,
दोस्तों का नाम ले देना वो दिन आज भी याद आते है। दोस्तों का नाम ले देना वो दिन आज भी याद आते है।
आओ तलाशें वो लम्हें फिर.. ..उन तारों भरे आसमानों में। आओ तलाशें वो लम्हें फिर.. ..उन तारों भरे आसमानों में।
आखिर कैसे मैं उसके बिना दीवाली मनाऊं आखिर कैसे मैं उसके बिना दीवाली मनाऊं
मेहँदी हाथों में रचा रही थी वो , हथेली पे लिखे मेरे नाम , मिटा रही थी वो , मेहँदी हाथों में रचा रही थी वो , हथेली पे लिखे मेरे नाम , मिटा रही थी वो ,
तेरे प्यार ने दे दी हमें सारे जहां की रोशनी, अब हम सूरज से क्या मांगे? तेरे प्यार ने दे दी हमें सारे जहां की रोशनी, अब हम सूरज से क्या मांगे?
तेरे आने के आहट से तुझे पाने की चाहत में माथे टेकूँगा... तेरे आने के आहट से तुझे पाने की चाहत में माथे टेकूँगा...
मेरी जिंदगी भी रंगीन हो गई जब तूने थामे हाथ मेरे। मेरी जिंदगी भी रंगीन हो गई जब तूने थामे हाथ मेरे।
तुम्हारा चेहरा मेरी आंखों में बसा है उसको दिल के आईने मैं बसा देंगे। तुम्हारा चेहरा मेरी आंखों में बसा है उसको दिल के आईने मैं बसा देंगे।
जिंदगी के सफर में सफलता पग पग पे बजाती उसका बीन। जिंदगी के सफर में सफलता पग पग पे बजाती उसका बीन।
कभी देते नहीं सही ध्यान तो जीवन में कई मुश्किलें घेर लेने लगती हैं कभी देते नहीं सही ध्यान तो जीवन में कई मुश्किलें घेर लेने लगती हैं
उससे लिप्त नहीं होता खुद को गन्ध नहीं समझने लगता। उससे लिप्त नहीं होता खुद को गन्ध नहीं समझने लगता।
वह इसी जाम से भूल जाते हैं हम दुनिया ऐसे ही बादनाम किए हुए हैंं। वह इसी जाम से भूल जाते हैं हम दुनिया ऐसे ही बादनाम किए हुए हैंं।
कभी वसंत कभी पतझड़ होगी, कभी धूप तो कभी बारिश होगी, कभी वसंत कभी पतझड़ होगी, कभी धूप तो कभी बारिश होगी,
यही दुआ हम अपनें रब से रोज करते है हम.. यही दुआ हम अपनें रब से रोज करते है हम..