Shabnam Parveen
Fantasy
आपकी याद आती रही रात भर
शबनमी आंखें मुस्कुराती रही रात भर।
रात भर दर्द का चिराग़ जलता रहा
ग़म की लाॅ थरथरती रही रात भर।
यादो की शमा जलती रही
शमा की रोशनी जगमगाती रही रात भर।
कई लहरें उठती रही
कई मौजें साहिल से टकराती रही रात भर।
मेरी याद में
अजनबी
रात भर
हमारी कहानी
जीवन एक सागर
मेरा बचपन
तेरा इंतज़ार
तालाबों को भर सी जाती है बारिश के चलते ही खेती हो पाती है । तालाबों को भर सी जाती है बारिश के चलते ही खेती हो पाती है ।
अपने को भूल जायें देखते ही रह जायें अपने को भूल जायें देखते ही रह जायें
हम दूर रहें सपनों के संसार से वास्तविकता में ऐसा होता नहीं है। हम दूर रहें सपनों के संसार से वास्तविकता में ऐसा होता नहीं है।
तुम भारत के नव निर्माण की नव चेतना के अग्रसर हो, आधार हो!! तुम भारत के नव निर्माण की नव चेतना के अग्रसर हो, आधार हो!!
आत्म रक्षा के गुर सीख लिए हैं मैंने भावनात्मक स्तर पर भी बलवती हूं अब मैं। आत्म रक्षा के गुर सीख लिए हैं मैंने भावनात्मक स्तर पर भी बलवती हूं अब मैं।
चांद आज मेरी खिड़की में चुपके से उतर आया है चांद आज मेरी खिड़की में चुपके से उतर आया है
प्रेम की इस बरसात में मैं हूँ तेरे ही अंदर । प्रेम की इस बरसात में मैं हूँ तेरे ही अंदर ।
बागों में पुष्प लताएं छाने लगीं। सुंदर सुगंधित पवन बहाने लगीं। बागों में पुष्प लताएं छाने लगीं। सुंदर सुगंधित पवन बहाने लगीं।
आज उठाया एक बच्ची को गोद में और उसकी किलकारी में ढूंढ ली अपनी हंसी आज उठाया एक बच्ची को गोद में और उसकी किलकारी में ढूंढ ली अपनी हंसी
चार दिनों का जीवन , अपना चार दिनों का डेरा रे चार दिनों का जीवन , अपना चार दिनों का डेरा रे
कमजोर ना समझना, मुझको नहीं परखना, कमजोर ना समझना, मुझको नहीं परखना,
नपुंसक बनकर घूमते हैं यहां भगवा पर इन्हें अभिमान नहीं। नपुंसक बनकर घूमते हैं यहां भगवा पर इन्हें अभिमान नहीं।
तभी परिणाम तुम को उसी के अनुरूप मिलेंगे।। तभी परिणाम तुम को उसी के अनुरूप मिलेंगे।।
निर्वस्त्र इच्छाओं का पत्र, था एक प्रेम की निशानी, हर पन्ने पर बसी थी, तुम्हार निर्वस्त्र इच्छाओं का पत्र, था एक प्रेम की निशानी, हर पन्ने पर बसी थी,...
मैं भीग रहा था बारिश की पानी में, मन में अलग थी खुशियों की एहसास। मैं भीग रहा था बारिश की पानी में, मन में अलग थी खुशियों की एहसास।
पुरानी यादों में मैं खो गया था खुशियां ढूंढने का बहाना खोज रहा था पुरानी यादों में मैं खो गया था खुशियां ढूंढने का बहाना खोज रहा था
सिसकियां है दबी होंठों के बीच अब तो किसी की बेवफाई में। सिसकियां है दबी होंठों के बीच अब तो किसी की बेवफाई में।
कहीं इज़हार-ए-मोहब्बत की तपिश, तो कहीं अल्फाज़ निकलता नहीं... कहीं इज़हार-ए-मोहब्बत की तपिश, तो कहीं अल्फाज़ निकलता नहीं...
हर तरफ एक मीठा अहसास दिल में छाने लगा है हर तरफ एक मीठा अहसास दिल में छाने लगा है
सिर्फ नज़रें बोलें, बिना कुछ कहे, एक दूजे की सांसों में समाए। सिर्फ नज़रें बोलें, बिना कुछ कहे, एक दूजे की सांसों में समाए।