Surendra kumar singh
Fantasy
रास्ते भी खुश हैं
अजनबी से।
कोई पहली बार इधर से
गुजर रहा है
सफर जारी रहा तो
जान पहचान हो ही जायेगी
और मंजिल भी खुश है
अजनबी के अपनापन से।
अभी प्यार न सही
रास्ता तो प्यार का है न।
संवाद 3
एक पल
तुम्हारे आगोश...
चलते चलते
तुम्हारा होना
एहसास
आज
चलो
सुबह है
'कांपती पत्ती गुलाब की, यूँ अधरों को में रूप देता, फिर सिखा तुझे नाम अपना, तुझसे नया सा सुन लेता।' ए... 'कांपती पत्ती गुलाब की, यूँ अधरों को में रूप देता, फिर सिखा तुझे नाम अपना, तुझसे...
हां यह सच है कि आज इजहार-ए- इश्क करते हैं तुमसे। हां यह सच है कि आज इजहार-ए- इश्क करते हैं तुमसे।
तू ही है प्रीत, तू ही मनमीत ,तू ही संगीत है जानम तुझे क्या नाम दूं जानम। तू ही है प्रीत, तू ही मनमीत ,तू ही संगीत है जानम तुझे क्या नाम दूं जानम।
भावनाओं की डोर पर तर्क के खंजर से न वार करना भावनाओं की डोर पर तर्क के खंजर से न वार करना
आईं मिथिला की राजकुमारी वधू बनकर तुम्हारा अहोभाग्य था आईं मिथिला की राजकुमारी वधू बनकर तुम्हारा अहोभाग्य था
एक कविता - : 'सबसे भूखा आदमी' एक कविता - : 'सबसे भूखा आदमी'
मोहब्बत नाम हटा देना इतिहास -भविष्य के ख्यालों से, मन के भावों से, जान प्यारी है तो मोहब्बत नाम हटा देना इतिहास -भविष्य के ख्यालों से, मन के भावों से, जान प्यार...
राधा कहतीं, " खूब जानती हूँ मैं तुम्हें", और रंग देतीं कृष्ण के गाल, और बिखर जाता सार राधा कहतीं, " खूब जानती हूँ मैं तुम्हें", और रंग देतीं कृष्ण के गाल, और बिखर...
जिस की आवाजें पल पल तुम्हें जगा देती, वह हमसफ़र यार तेरा सिर्फ मैं हूं जिस की आवाजें पल पल तुम्हें जगा देती, वह हमसफ़र यार तेरा सिर्फ मैं हूं
वात्सल्य उनकी आँखों का वर्णन से है दूर बहुत वात्सल्य उनकी आँखों का वर्णन से है दूर बहुत
और हमारे प्यार से रिश्ता अब सपनों की दुनिया मे निभाया करो और हमारे प्यार से रिश्ता अब सपनों की दुनिया मे निभाया करो
मुसलसल खुशियों के लिये हल खोजा गया मुसलसल खुशियों के लिये हल खोजा गया
बाते करते करते तेरा रो देना वह भावात्मक भाव तुम्हारा हो बाते करते करते तेरा रो देना वह भावात्मक भाव तुम्हारा हो
सबके लिए खास-खास बनें यहां, बस तुम अपनी पहचान ले बंदे। सबके लिए खास-खास बनें यहां, बस तुम अपनी पहचान ले बंदे।
यह बहती नदी भी मैं आज से तुम औरतों के हवाले कर रहा हूँ यह बहती नदी भी मैं आज से तुम औरतों के हवाले कर रहा हूँ
मृत्यु का आगमन, एक निश्चित सत्य, जीवन की चरम सीमा, अन्त की यह प्रेरणा। मृत्यु का आगमन, एक निश्चित सत्य, जीवन की चरम सीमा, अन्त की यह प्रेरणा।
इसलिए वह कुछ बोलता नहीं है सिर्फ देखता रहता है, मुस्कुराता रहता है। इसलिए वह कुछ बोलता नहीं है सिर्फ देखता रहता है, मुस्कुराता रहता है।
भर दे एहसास अपने होने का कि मैं हूं ना सिर्फ तुम्हारे लिए, स्त्री बस यही तो चाहती ह भर दे एहसास अपने होने का कि मैं हूं ना सिर्फ तुम्हारे लिए, स्त्री बस यही तो ...
क्यों खामोश बैठे हो वार करोगे क्या ? मेरे भरोसे को तार-तार करोगे क्या? क्यों खामोश बैठे हो वार करोगे क्या ? मेरे भरोसे को तार-तार करोगे क्या?
ब्रज भूमि तो पिया की मोरे लीला का स्थल था, सीखना जो सबको पाठ अमर था ब्रज भूमि तो पिया की मोरे लीला का स्थल था, सीखना जो सबको पाठ अमर था