STORYMIRROR

सीमा शर्मा सृजिता

Abstract Inspirational

3  

सीमा शर्मा सृजिता

Abstract Inspirational

राम तुम फिर आओ

राम तुम फिर आओ

1 min
260

हर घर में एक रावण बैठा 

व्यथित हो रही नारियाँ 

सीता की तरह ही बचाओ 

राम तुम फिर आओ .....

 

वो सौम्यता वो सरलता 

पुरुषों में कहीं खो गई 

सच्चे पुरुष के गुण बताओ 

राम तुम फिर आओ .....


वो धैर्यता, वो समर्पण 

मात पिता को सब अर्पण

रिश्तों की प्रीत समझाओ 

राम तुम फिर आओ.... 


अगर राम मिलें तो हर नारी 

सीता की तरह ही बलिहारी 

प्रेम का पाठ सबको पढ़ाओ

राम तुम फिर आओ.... 


अमानवता और क्रूरता ने 

घेर लिया है पृथ्वी मां को 

कलयुग में सतयुग लाओ 

राम तुम फिर आओ... 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract