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Madhu Gupta "अपराजिता"

Romance

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Madhu Gupta "अपराजिता"

Romance

"प्यार "

"प्यार "

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जमाने भर की खुशियों का वो वादा साथ करता था।

तेरे होने से मैं हूँ ,ये कहकर मुख़ातिब वो मुझको करता था।।


 जमी पर चांद तारे लाकर तेरा दामन मैं खुशियों सेभर दूंगा।

सुबह- शाम ये कहकर, मुख़ातिब वो मुझको करता था।।


मेरी तकदीर हो जाना कभी ना दूर तुम मुझसे हो जाना।

तिनके- सा टूट जाऊँगा, कहकर मुख़ातिब वो मुझको करता था।।


मेरी सांसे मेरी धड़कनें तेरे साथ होने से चलती हैं।

तू बनके लहू मेरा रगों मे बहती हो, ये कहकर मुख़ातिब वो मुझको करता था।।


मेरे नग़मे तेरे होंठों की हँसी देख कर गुनगुनाने लगते हैं।

हर साज़ जीवन का तेरे बिन आधुरा हैं, ये कहकर मुख़ातिब वो मुझको करता था।।


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