STORYMIRROR

Archna Goyal

Drama

3  

Archna Goyal

Drama

पूस की रात

पूस की रात

1 min
319

पूस की आधी ठंडी सी रात हो

ठिठुरा सा काँपता गात हो

बीच रखी मध्यम सी आँच हो

बस कुछ जनो का साथ हो।


मीठी मीठी रसभरी बात हो

छाई हुई थोड़ी थोड़ी बदरी हो

उस पर तन से लिपटी चदरी हो

पास ही एक खाट बिछरी हो।


जहाँ बूढ़ी दादी भी लेटी हो

जैसे हम सब जनों की पहरी हो

आँखों आँखों मे कटती रात हो

खिड़की से झाकँती बौछार हो।


होठों पर धीमी धीमी रागिनी हो

जैसे कोई माया आ के ठहरी हो

वाह जी क्या बात निशां कहरी हो

ऐसे ही पूस की हर रात सुनहरी हो।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama