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Archna Goyal

Abstract

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Archna Goyal

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गर्भ

गर्भ

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बचपन खो गया तो कोई गम नहीं

जवानी मिल गई

जवानी खो गई तो कोई गम नहीं

बुढ़ापा मिल गया


बुढ़ापा मिल गया तो कोई गम नहीं

मौत मिल गई

मौत मिल गई तो कोई गम नहीं

पुन: जन्म मिल गया


पुन: जन्म मिला तो नया शरीर मिल गया

नया शरीर मिला तो कोई गम नहीं

मुझे लड़की का रुप मिल गया

मुझे ये रुप मिल गया तो भी कोई गम नहीं


लेकिन मुझे गर्भ में ही

दफना दिया गया

गर्भ को गर्भ न रहने दिया

कब्रिस्तान बना दिया


हर तीसरी औरत एक कब्र

लिए जी रही है गर्भ में

वाह नारी तन को

क्या गर्भ स्थान बना दिया


हिंदुस्तान मानवता संस्कारों की

भूमि रही है युगों से

इन नवपीढ़ी ने इसे

हमारा अपमान बना दिया।


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