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अंकित शर्मा (आज़ाद)

Abstract Romance Others

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अंकित शर्मा (आज़ाद)

Abstract Romance Others

पुकार

पुकार

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अम्बर में कोई बादल घुल जाता है ज्यों, 

अब तो बस यूं ही घुल जाने को दिल करता है,


कोई पत्ता पेड़ से टूटता है ज्यों, 

टूट कर बिखर जाने को दिल करता है,


ज्यादा नहीं ऊंची है जीवन पतंग मेरी, 

पर डोर कटा लेने को दिल करता है,


सागर से ज्यों मिलने जाती हैं नदिया,

तुमसे मिलने जाने को दिल करता है,


जैसे लौट जाते है पंछी अपने घोसलों को,

अपने असली घर जाने को दिल करता है.


मिल जाते है जैसे निशा-प्रभात, सांझ और रात,

तुमसे मिल जाने को दिल करता है,


प्यार जैसा होता है चाँद और चकोर का,

उस टीस को जगाने को दिल करता है।


भानु ज्यों दौड़कर प्यार करता क्षितिज से,

उस प्यार को पाने को दिल करता है,


हे ईश्वर। 


हर अगला पल अब भाव विह्वल करता है,

पुकार सा गूंज जाने को दिल करता है।


अब तो बस तुझे गले लगाने को दिल करता है

तुझे एक बार देख पाने को दिल करता है।



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