" पत्थर को पारस किया "
" पत्थर को पारस किया "
पत्थर को पारस किया, खास किया अनमोल
करूणा प्रज्ञा शील का, दिया वह अमृत घोल
दिया वह अमृत घोल, अंगुलिमाल को भाया
छोड़ सभी हथियार, शरण में दौडा आया
समझ बनीं आधार, बुद्ध की महिमा अक्सर
खूब करें हम नमन, किया है पारस पत्थर।
