प्रतिपल प्रेम
प्रतिपल प्रेम
प्रेम—एक ऊर्जा का प्रवाह है,
जो आत्मा से आत्मा को जोड़ता है।
यह ब्रह्मांडीय लय है,
जो हर धड़कन में दिव्य संगीत रचता है।
यह प्रकाश का एक कण है,
वह फोटॉन, जो भावनाओं को आलोकित करता है,
और एक गुरुत्वाकर्षण बल की तरह
हृदयों को पास लाता है।
उसकी आँखों में आकाश की गहराई है,
जहाँ सितारे अपनी कहानी कहते हैं।
उनकी चमक एक ब्रह्मांडीय रहस्य की तरह,
मुझे अपनी ओर खींचती है।
उसकी मुस्कान—वसंत की बयार,
जिसमें प्रेम के कण हवा में घुल जाते हैं।
उसका स्पर्श विद्युत तरंग सा है,
जो हर कोशिका में जीवन भरता है।
प्रेम एक रासायनिक चमत्कार भी है,
जहाँ ऑक्सीटोसिन और डोपामिन
दिल को तरंगित करते हैं।
यह मन और आत्मा का संलयन है,
एक अनंत आनंद का अनुभव।
उसका आलिंगन ब्रह्मांडीय शक्ति है,
एक ऊर्जा क्षेत्र जो मुझे समेट लेता है।
यह क्षण—जैसे ध्यान की अवस्था,
जहाँ समय थम जाता है।
प्रेम अध्यात्म का मार्ग भी है,
जहाँ आत्मा अपनी पूर्णता पाती है।
यह मोक्ष की वह झलक है,
जो हर स्पर्श में ईश्वर का आभास देती है।
तो क्यों न इस प्रेम को प्रतिपल जीऊं,
क्योंकि यह केवल रसायन नहीं,
यह ब्रह्मांड का सत्य है,
मेरा प्रेम—मेरा ब्रह्म, मेरा अनंत।

