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S Ram Verma

Romance

2  

S Ram Verma

Romance

प्रतीक्षित प्रेम !

प्रतीक्षित प्रेम !

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मेरे जीवन की तमाम 

अमावस की रात को 

अपनी शीतल चांदनी 

से जगमगाने ही तो 

इस धरती पर आयी 

हो ना तुम

मेरे असीम विश्वास को 

अपने सच्चे समर्पण से 

उसे शिव बनाने ही तो 

इस धरती पर आयी 

हो ना तुम

मेरे अटूट प्रेम का 

सिन्दूर लगा कर मुझे 

अपना प्रखर बनाने ही तो 

इस धरती पर आयी 

हो ना तुम

मेरे चीर प्रतीक्षित प्रेम 

को अपनी प्रीत के अमरत्व 

से अमर बनाने ही तो इस 

धरती पर आयी 

हो ना तुम

ओ मेरी प्राणप्रिये 

मेरे इश्क़ के बीज को 

खुद की धरा में बो कर 

उसका विस्तार करने ही 

तो इस धरती पर आयी 

हो ना तुम !



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