STORYMIRROR

S Ram Verma

Romance

3  

S Ram Verma

Romance

प्रतीक्षित प्रेम !

प्रतीक्षित प्रेम !

1 min
219

मेरे जीवन की तमाम 

अमावस की रात को 

अपनी शीतल चांदनी 

से जगमगाने ही तो 

इस धरती पर आयी 

हो ना तुम

मेरे असीम विश्वास को 

अपने सच्चे समर्पण से 

उसे शिव बनाने ही तो 

इस धरती पर आयी 

हो ना तुम

मेरे अटूट प्रेम का 

सिन्दूर लगा कर मुझे 

अपना प्रखर बनाने ही तो 

इस धरती पर आयी 

हो ना तुम

मेरे चीर प्रतीक्षित प्रेम 

को अपनी प्रीत के अमरत्व 

से अमर बनाने ही तो इस 

धरती पर आयी 

हो ना तुम

ओ मेरी प्राणप्रिये 

मेरे इश्क़ के बीज को 

खुद की धरा में बो कर 

उसका विस्तार करने ही 

तो इस धरती पर आयी 

हो ना तुम !



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance