STORYMIRROR

Gopal Agrawal

Abstract

3  

Gopal Agrawal

Abstract

प्रश्न के हल में अटक रहा

प्रश्न के हल में अटक रहा

1 min
270

आज हर आदमी दर दर भटक रहा है,

किसी न किसी प्रश्न के हल में अटक रहा है

इंसान के साथ समस्या चली आ रही है

सुख मिलना तो दूर खुशियाँ भी दूर जा रही है

प्रेम भाई चारा नहीं बचा अब इस जहान पर

छोटी छोटी बातों पर ही इंसान झगड़ रहा है

परेशान कुछ नौ जवां खाने लगे है अब जहर

तो कोई गम मिटाने शराब को गटक रहा है

आज हर आदमी दर दर भटक रहा है

हर प्रश्न का उत्तर अभी भी लटक रहा है


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract