STORYMIRROR

अनजान रसिक

Abstract Romance Classics

4  

अनजान रसिक

Abstract Romance Classics

प्रकृति के रंग

प्रकृति के रंग

2 mins
314

आइए आज मुलाक़ात करते हैं ज़िन्दगी और प्रकृति की सुषमा से,

फिर से ढूंढने की,महसूस करने की कोशिश करते हैं

चमत्कार हज़ारों रंग का समाहित हैं जो इसके किस्से -किस्से हिस्से - हिस्से में।

एक रंग है लाल इसका, जिस से मिल जाती जीवन को लालिमा,

लाल रंग के लहू से ही रोशन हो उठती ज़िन्दगी हर पल,हर क्षण,


प्रकृति के लालिमा से प्रेम प्रसंग का देखने को मिलता

देश-दुनिया को फिर से एक अद्भुत नज़ारा और एक पल।  

लाल रंग के गुलाब से ही एक प्रेमी अपनी प्रेमिका को रिझा लेता,

डूबते और उगते सूरज की लाली के दर्शन पाने हेतु

जग जाने कितने कयास और प्रयास कर जाता।  


दूजा रंग हरा है जो खुशहाल, समृद्ध, लहलहान और मनमोहक इस संसार को बनाता,

कण- कण में जीवन और ऊर्जा भर के कोशे-कोशे के नव निर्माण का प्रतीक बन जाता।  

पीले सरसों के खेतों का सौंदर्य -पूर्ण नज़ारा दर्शकों को लुभान्वित कर देता भरपूर,

भिछडे हुए पुष्प और पत्ते की पुनर्मिलन की ये बेला,

पास ले आती उनको जो सदियों से रहे एक दूजे से दूर।


काले मेघ जब बरस-बरस के हरियाली ही हरियाली चहुँ ओर फैला जाते,

नव-जीवन का निर्माण कर जाते,

खुशियों का आगाज़ कर के जन -जन को जीने की वजह एक नयी दे जाते।

और वो सतरंगी इंद्रधनुष जो चार- चाँद लगा देता इस मनोहारी दृश्य में,


सौंदर्य से अपने सम्पूर्ण संसार को सुरमई बना कर,

रंगीन सारा वातावरण कर जाता उस एक ही क्षण में। 

नाचते हुए रंग-बिरंगे मयूर और तितलियाँ रमणीक और उत्कृष्ट बना देता पूरा नज़ारा,

प्रकृति के इन भिन्न-भिन्न रंगों का दर्शन कर सबका मन हो जाता बहारा - बहारा।


होली के त्यौहार की ख़त्म हो जाती प्रतीक्षा तब,

तब ना रहती रंगारंग कार्यक्रम की लालसा,

तृष्णा बुझ जाती सबकी देख के प्रकृति की

ऐसी अविस्मरणीय साज-सज्जा।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract