STORYMIRROR

Anita Sharma

Tragedy Inspirational Others

4  

Anita Sharma

Tragedy Inspirational Others

परिंदा क्या चाहे

परिंदा क्या चाहे

1 min
431

परिंदा तो चाहे खुला आसमान

सुदूर गगन में भरना चाहे वो उड़ान

ना कैद करो तुम सलाखों में उसको

ना कतरो उसके फड़फड़ाते परों को


नाखुश है वो सोने के कफ़स में फंसकर

क्यूंकि ऊंची उड़ानों का रहा वो सिकंदर

बंदिशों में रहकर कहाँ उसे अन्न भाता है

जो खुद चुनकर ख़ुशी से दाना जुटाता है


मत कांटों-छाँटो ये हरे- भरे घने वृक्ष

तिनका-तिनका जोड़ वो नीड़ बनाता है

घनी वर्षा और हवा के गर्म थपेड़ों से 

इन बसेरों में वो अपना जीवन बचाता है


परिंदा भी कहे...तुम भी जागो ए इंसान

थोड़ी इंसानियत रखो क्यों बनते हो हैवान

करो मेरा स्वागत, ज़रा मुंडेर पर आने दो

भोर होते ही बागों में खुलकर चहचहाने दो


रख सको नेह से तो रख दो पानी के सकोरे

मन भरकर चुगने को...दानों से भरे कटोरे

कुछ तुम भी सहयोग करो और वृक्ष लगाओ

आश्रय मुझे देकर थोड़ी मानवता दिखाओ


जो करना चाहो तुम प्रकृति की सुरक्षा

दफ़ना दो ना कहीं विकृत मानसिकता

पशु-पक्षी पेड़-पौधे है ईश्वरीय वरदान

इनके बिना ये ज़मीन जैसे है श्मशान 

आओ सब मिलकर बचाएँ पर्यावरण

प्रेम और सुरक्षा का चढ़ाएं आवरण



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy