प्रीत पुरानी, नहीं भुलानी
प्रीत पुरानी, नहीं भुलानी
यह नहीं कोई है कथा या कहानी:
नहीं बकैती है किसी की यह बेमानी !
बात ये बड़ी अनोखी सी है समझानी :
अपने अनुभव से सीखी औ देखी जानी !
जीवन ने दिया है हमें यह अवसर :
अपनी बात बताने को मनमानी !
आतुर बड़ा होता है मन सुनाने को :
दिल की बात अकुलाने को है जानी !
समय ने क्या-क्या दृश्य दिखाये :
चित्रण नहीं मैं कर सकती अज्ञानी !
ईश्वर ने ली मेरी खूब परीक्षा :
वर्णन नहीं मैं ऐसे कर सकती रानी !
पर अब नहीं कोई दर्द सहना है :
दर्द से नाता तोड़ दिया ये मानी !
कैसे जीना है हमें ये ज़िंदगी :
कला ये मैंने सीख लिया दिलजानी !
नहीं भरोसा अब क़िस्मत पर :
पीछे उसको छोड़ दिया विरानी !
लक्ष्य ही हमारा सब कुछ है :
बस उधर राह मोड़ लिया तूफानी !
बहुत ज़रूरी कुछ किंवदंतियाँ हैं :
जिनका नहीं है जग में कोई सानी !
डटे रहो, सब कुछ सह जाओ :
आगे कदम बढ़ाए जाओ सैनानी !
बड़े बुजुर्ग सही कहा करते थे :
हिम्मत सदा बँधाते रहे विद्वानी !
हर मुश्किल का करो सामना
यही समझाते रहे पूर्वज महाज्ञानी !
अपने ह्रदय पटल पर स्मरण रखना :
इन अनमोल पलों को प्रीत पुरानी !
नहीं बिखरने देना ये नहीं है भुलानी :
इनमें निरंतर संघर्ष की है कहानी !
