STORYMIRROR

S Ram Verma

Romance

2  

S Ram Verma

Romance

प्रेम !

प्रेम !

1 min
313

प्रेम है 

एक जंगली 

जानवर सा

जो चुपके से 

मन और तन 

को दबोच लेता है।

उम्मीदों की रोशनी

जलाता है ना चाहते 

हुए भी उससे बचा

नहीं जा सकता।

प्रेम है

उस कमर तोड़

बुखार सा जो 

सरसराता हुआ

रगों में दौड़ता है।

और हर दवा हर

वर्जना को तोड़ता 

हुआ घर कर लेता है।

वो हमारे मन तन और 

मस्तिष्क पर भी आखिर 

कोई कैसे और कब तक 

बच सकता है उस 

प्रेम से।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance