प्रेम समर्पण है
प्रेम समर्पण है
प्रेम मुक्ति है ...
प्रेम समर्पण है...
प्रेम निश्छल गंगा की जलधार है !
प्रेम निःस्वार्थ भाव की फुहार है !
प्रेम त्याग है ...
प्रेम ऊर्जा है ...
प्रेम सूर्य रश्मियों सी लालिमा सा !
प्रेम चन्द्र किरन की चाँदनी सा !
प्रेम हिमालय पर्वत पर बिखरी सफ़ेद हिमानी सा !
प्रेम समर्पित मीरा के भक्ति भाव सा पावन
प्रेम सूर के कान्हा सा मनभावन ....
प्रेम सूर्य किरणों सम सुनहरा लाल ..
प्रेम सुर्ख गुलाब की पंखुड़ियों सा लाल!
प्रेम एक सिंदूरी शाम जैसे लाल !
प्रेम एक अनसुलझा सा गणित का सवाल !
प्रेम कबीर की भक्ति भाव सा निराकार
प्रेम तुलसी की चौपाई में भक्ति सा साकार !!
काश कि प्रेम भाव को ...
सब लोग समझ पाते !!
तो शायद आज कई जीवन की..
उलझनों से ...
निजात पाते ।
