प्रेम-पत्र
प्रेम-पत्र
रिमझिम रिमझिम बारिश
और
सांझ की तन्हाई,
ऐसे में तेरी याद
फिर से सताने चली आई,
आसमान से गिरती बूंदें
रुनझुन पायल सी
बजती हैं,
वर्षा की बूंदों सम
नयनों से,
तेरी याद बरसती है
विरह- विदग्ध दिल
ने फिर---
अफसाना इक रच डाला है
दिल के जज्बात--
बयां करने को---
प्रेम-पत्र लिख डाला है,
दिल ने रिल को
भेजी पाती,
दिल से ही
तुम पढ़ लेना---
भूली-बिसरी यादों से
तुम भी
आंखे नम कर लेना।
रिमझिम बारिश की
बूंदों से तुम--- चेहरा
जरा भिगो लेना---
आंखों -आंखों में ही
दिल का प्रेम पत्र तुम पढ़ लेना!

