STORYMIRROR

sargam Bhatt

Abstract Romance Inspirational

4  

sargam Bhatt

Abstract Romance Inspirational

प्रेम मुक्तक

प्रेम मुक्तक

1 min
214

मोहब्बत की बातें बहुत हो चुकी,

सो जाओ अब रातें बहुत हो चुकी।

इतना ना तड़पाओ तुम दीवाने को अपने-

आज के लिए मुलाकातें बहुत हो चुकी।


माना कि तुम बहुत प्यार करते हो,

अपने प्यार का कुछ यूं इजहार करते हो।

लेकिन समझते नहीं मेरी मजबूरियों को-

फिर खुद को कैसे समझदार कहते हो।


ना समझने वाले को मैं सुनामी लगती हूं,

जो नहीं देखता मुझे उसे गुम -नामी लगती हूं।

जो समझना नहीं चाहता मुझे हर हालात में-

उसे हर वक्त मैं बदनामी लगती हूं।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract