प्रेम मुक्तक
प्रेम मुक्तक
मोहब्बत की बातें बहुत हो चुकी,
सो जाओ अब रातें बहुत हो चुकी।
इतना ना तड़पाओ तुम दीवाने को अपने-
आज के लिए मुलाकातें बहुत हो चुकी।
माना कि तुम बहुत प्यार करते हो,
अपने प्यार का कुछ यूं इजहार करते हो।
लेकिन समझते नहीं मेरी मजबूरियों को-
फिर खुद को कैसे समझदार कहते हो।
ना समझने वाले को मैं सुनामी लगती हूं,
जो नहीं देखता मुझे उसे गुम -नामी लगती हूं।
जो समझना नहीं चाहता मुझे हर हालात में-
उसे हर वक्त मैं बदनामी लगती हूं।

