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Madhu Vashishta

Romance Others

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Madhu Vashishta

Romance Others

प्रेम की परख

प्रेम की परख

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प्रेम की क्या परख करना?

सबको दिखता है मैं हारा हुआ हूं प्रेम में लेकिन जिस से प्रेम किया उससे क्या जीतना?

उसके चेहरे पर जीत की खुशी देखने के लिए ही तो जीत के भी हारा हूं मैं।

हाथ छुड़ाकर छोड़कर मुझे कहां जाएगी वो?

मुझे पता है इस जन्म में ही क्यों किसी भी जन्म में

मुझसे ज्यादा प्यार करने वाला नहीं पाएगी वो?

जीने दो उसे अपनी खुशियां और अपनी जिंदगी।

जब भी तनहा और विकल होगी।

जीवन के कटीली रास्तों में अकेली पड़ी होगी।

जब भी उसे किसी की जरूरत होगी।

तब मुझे अपने साथ ही खड़ा पाएगी वो।

मेरे लिए तो उसकी यादें बहुत है।

मेरी खुशी उसकी खुशियों में निहित है।

मेरे प्रेम की तुम परख कैसे करोगे।

वह दूर रहकर भी मेरे में ही सीमित है।


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