प्रेम गीत
प्रेम गीत
चेहरे पर
झलक दिखाती
झुर्रियों
और असमय
पके बालों के साथ
मेरी बढ़ती झुंझलाहट
उसे मेरी ओर से
जरा भी विमुख
नहीं करती
बल्कि
एक नया नाम
और जुड़ जाता है
प्रेम से सिक्त
मेरे अनगिनत
अजीबो गरीब नामो की
लिस्ट में
जो वो तब से
जोड़ता आ रहा है
जब मैं उसकी
कुछ भी
नहीं थी।
इस देह में
उठती तीव्र
दर्द की लहरें
और उसके चेहरे पर
अनुभव का तेज
मुस्कराते होंठो पर
"सब ठीक कर दूंगा"
का जप जैसे
असर करता है
दुधारी तलवार सा
मेरे हर दर्द के
जिस्म और मन पर
पसरने पर।
वो जो
खुद
खामोशी से
अपने दुख दर्द को
जीता हुआ
झेलता हुआ
साथ लिए चलता है
खुशियों का
कोमल रेशमी चँवर
गुनगुनाता हुआ
आस से भरे सपनो की
मधुर धुन
हर बार सुकून की
बयार से
दोस्ती गांठता हुआ
सिर्फ एक
मेरे लिए।
एक
आशीष सा
जीवन से जुड़ा वो
मेरी खीझ में भी
हमारे प्यार को हरदम
सींचने वाला
मेरा हमकदम
मेरा जीवनसाथी
रहे चश्मेबद्दूर
कि वो मेरा दिया
और मैं उसकी
बाती।

