STORYMIRROR

Bhawna Kukreti Pandey

Tragedy

4  

Bhawna Kukreti Pandey

Tragedy

मुझे चाहिए वो..🙏

मुझे चाहिए वो..🙏

1 min
393

कहां तो 

रत्ती भर भी 

घबराना नहीं था

सबको 

ढांढस बंधाते हुए

आंखों थामे आंसुओं को

अंदर ही अंदर 

रूंधे गले तक पहुंचाना था

यह कह पाने के लिए

कि सब ठीक हो जाना है। 


मगर उसे

वेंटीलेटर पर देखना 

मानो अपनी  

नीव के हिल जाने का 

खौफनाक 

मंजर देख रही होऊं

चाह कर भी

मन की भयंकर 

उथल पुथल को

पूरे शरीर से 

गुपचुप गुजरता महसूस 

करते हुए

वापस चेहरे पर 

उजागर होने से

रोक नहीं पाई। 


वो मजबूत पेड़ 

नहीं बन पाई जिसकी

शाखों में भूकंप 

के बाद भी

पंछियों को 

अपने घोंसलों का

आसरा बना रहता है। 


गिनते जा रही हूं

उसके कष्ट में 

बीतते हुए दिन 

और देते जा रही हूं

दुआओं में कुछ 

सुंदर दिनों के बदले 

अपने जीवन के साल

उस अदृश्य 

परमात्मा को

किसी नादान की तरह 

मानो सुन ही लेगा 

मान ही लेगा 

मेरी गुहार। 


"मुझे 

चाहिए वो

अपने होने

के लिए।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy