लिहाज
लिहाज
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अक्सर
कुछ बातो ने
मेरी रातो से नींद छीनी तो
बताया इंसाफ कुदरत से हो तो
रातो को भी कोई
शिकवा नही होता है।
बहुत बार
खामोश लम्हों ने
सिखाया भी कि
किसी खास का कम बोलना
लफ्जों की तंगी नही,
अपना न समझना
होना होता है।
खूबसूरत यादों
की टीस ने जताया कि
उनका होकर
भी न महसूस होना
अहसासों का बेजान होते
जाना होता है।
यूं लिखते हुए
कलम का बार बार
एक नाम पर रूक जाना
कुछ छिपाना नहीं
किसी बदरंग रिश्ते का
लिहाज रखना
होता है।
