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B. Pandey

Abstract

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B. Pandey

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सवाल मिटता हुआ सा है...

सवाल मिटता हुआ सा है...

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मन पर 

कभी किसी का 

बस नहीं चलता 

ये सच  

सुना भी था, 

ये सच 

जिया भी था।

मगर अब

मन पर 

किसका  बस 

चल रहा है 

समझ नहीं आता।

क्या इसे उम्र की लगाम 

कस रही है

या विवेक की रोशनी

राह  दिखा रही है ?


दोनों ही सूरतों में

चंद यादें

मिटती जा  रही हैं

यह नुकसान है या.फायदा 

कुछ पता नहीं 

और मन भी 

इस बात पर छटपटा 

नहीं रहा ,

शांत पड़ा हुआ है।


मुझे लगता तो है कि 

इसका जवाब हैं कहीं

मगर 

यह सवाल भी तो 

मन की आँखों में

मिटता  हुआ सा  है ।  








 



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