STORYMIRROR

परछाई...

परछाई...

1 min
811




सून तू चाँद की परछाई है

तेरे नूर में सागर की गहराई है .....


तेरा गुस्सा जैसे बादल

मैं खुली किताब जैसे पागल

आ पढ़ले मुझको तू मेरी तन्हाई है....


सूरज की किरण धरती छू लेती है

मेरी धडकन तेरा गीत गा लेती है

मोहब्बत की धून मेरे लबों पर आई है....


तुझसे ही जुड़े मेरे नग्मे

जग से प्यारे लगे इश्क़ के लम्हे

मेरी आशीकी भी क्या रंग लाई है.....


तू इश्क़ मेरा तू बन जा मेरी दुवा

संगम को तुझसे ईश्क हुवा

मेरे पर तू काबीज दिल पर छाई है.....


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance