पंछी के उड़ान
पंछी के उड़ान
आजाद गगन आजाद पवन
उड़ता पंछी आजाद चमन
फिरता करता आजाद रमण
पँख फैलाये ऊँचे ऊँचे छूने
आसमान को अपने
पूरा करता मन के सपने
चहूँ और दिशाओं मैं उड़ता
बिना किसी रोक
ना कोई बंदिश
ना कोई टोक
उड़ तू भी पंछी बन के
पंख फैलाये ऊँचे ऊँचे
पूरे कर अपने सपने
देखे जो जीवन मैं तूने
आजादी के परवाने सा
उड़ता फिर गगन मैं अपने
जैसे चलती पवन मंद मंद
फैला चहूँ और अपनी सुगंध
आहुति दे शुभ कर्मों की
पूर्णाहुति से पूर्ण कर ये हवन
शुभ मंगलकारी हो तेरे करम
जहाँ भी पड़ें तेरे ये चरण
आजाद गगन आजाद पवन
पंछी कि तरह उड़ता फिर
चहूँ और चमन
चहूँ और चमन।
