पलकों पर शाम सजाई है
पलकों पर शाम सजाई है
पलकों पर शाम सजाई है
अँखियों से मोतियों की धारा बहाने
पुरानी यादें फिर चली आई है
आज साथ मेरे कोई नहीं सिर्फ मेरी तनहाई है
जिंदगी फिर कर गई मेरे साथ बेवफाई है
जीत हार का कोई मतलब नहीं अब किस बात की लड़ाई है।।
