STORYMIRROR

Amrita Rai

Tragedy Others

2  

Amrita Rai

Tragedy Others

पलकों पर शाम सजाई है

पलकों पर शाम सजाई है

1 min
125

पलकों पर शाम सजाई है 

अँखियों से मोतियों की धारा बहाने

पुरानी यादें फिर चली आई है

आज साथ मेरे कोई नहीं सिर्फ मेरी तनहाई है

जिंदगी फिर कर गई मेरे साथ बेवफाई है

जीत हार का कोई मतलब नहीं अब किस बात की लड़ाई है।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy