STORYMIRROR

Amrita Rai

Inspirational Others

2  

Amrita Rai

Inspirational Others

लिखते लिखते रुक जाते है

लिखते लिखते रुक जाते है

1 min
121

लिखते लिखते रुक जाते है

मां तेरी तारीफ करूँ जिससे

वो लफ्ज़ नहीं मिल पाते हैं

निःस्वार्थ प्रेम एक तुम्हीं से पाते हैं

तुम्हारी दुआओं का ही असर है

कि दुनिया के हर कष्ट को हंस कर झेल जाते हैं

तुझसे दूर होने की सोच मात्र से मुरझा से जाते है।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational