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ashok kumar bhatnagar

Inspirational

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ashok kumar bhatnagar

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“पिता: मूक और गुप्त समर्थक”

“पिता: मूक और गुप्त समर्थक”

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न कभी खाली हुई मेरी तबीयत उनके सामरिक आह्वान पर,

न कभी रहा अन्याय अन्योग की दहशत में।

पिता के हाथों की छाँव ने दिया मुझे शक्ति,

उनके बिना रहा ही नहीं मैं इस संसार में स्पर्शी।


पिता: वीर और संचारी महान,

जो हर समय रहते थे दिल के पास।

न सिर्फ़ एक रोल में बने थे वे पिता,

बल्कि दिल के बंधन में थे सदैव समर्थी स्पर्शी।


माँ की आँखों में बहती हैं आंसू,

पर पिता हैं हमारी रक्षा का जड़ 

वे देते हैं हमें सबकुछ बिना कहे,

उनका हौसला है अद्भुत, निर्मल और सच्चा 


पिता की गोद में मिलती हैं राहत,

उनकी ममता का असर होता है सर्वदा।

जीवन के बड़े संघर्षों में,

पिता होते हैं साथ, विश्वास और उत्साह में।


वे हैं साधारण, पर अद्भुत शक्तिशाली,

हमारी नींव, हमारी सुरक्षा के अमूल्य दुलारी।

पिता, तुम सदैव हमारे साथ हो,

तुम्हारे बिना हमारी दुनिया है सूनी सी, वीरान सी।


जीवन की यात्रा में, अनेक रंग हैं,

पर पिता का सहयोग अद्वितीय और संगीतमय है।

वे हमेशा हमारे पीछे छिपे होते हैं,

विश्राम और सफलता के प्रतीक, वे ही होते हैं सच्चे मित्र।


तेरे ऊपर जो नज़रें हैं तारीफ़ करने की,

वो सब मुझसे ही चाह रही हैं छुपाने की।

मैं तेरी हर ख़ुशी का रखवाला हूँ,

पर बाहर दिखता नहीं, बस अपनी भूमिका निभाने की।


पिता: शांत और गुप्त सहायक,

हमारी प्रगति में होते हैं वे सर्वोच्च प्रेरणास्रोत।

उनके आशीर्वाद से बढ़ता हैं हमारा जीवन ,

पिता, तुम हो हमारे जीवन का रहस्यमय सौंदर्य।

पिता: शांत और गुप्त सहायक



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