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RASHI SRIVASTAVA

Classics

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RASHI SRIVASTAVA

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फूलों सी नाज़ुक प्यारी बेटियां

फूलों सी नाज़ुक प्यारी बेटियां

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फूलों सी नाज़ुक और प्यारी होती बेटियां,

चिड़ियों सी चहचहाती महकती हैं बेटियां।


उनको पता है दूसरे घर उनको है जाना 

परायों को भी प्यार से अपना है बनाना,

हंस हंस के सितम सारे ये सहती हैं बेटियां

चिड़ियों सी चहचहाती महकती हैं बेटियां।


होती समय की पाबंदी घर आने जाने को 

बाहर खड़े हैं वहशी उन्हें नोच खाने को,

हो जाए कुछ ग़लत तो लोग उन्हें ही बोलते 

अपना ज़मीर ईमान ना कभी टटोलते,

बेड़ी खुद अपने पैरों में बंधवाती बेटियां 

चिड़ियों सी चहचहाती महकती हैं बेटियां।


हैं दूज का टीका और राखी ये बेटियां 

हैं बहनों की सहेली हमराज़ बेटियां,

हैं घर की इज्ज़त और संस्कार बेटियां 

करती हैं दो कुलों को रौशन ये बेटियां,

चिड़ियों सी चहचहाती महकती हैं बेटियां।


फूलों सी नाज़ुक और प्यारी होती बेटियां,

चिड़ियों सी चहचहाती महकती हैं बेटियां।


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