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Prakash kumar Yadaw

Romance

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Prakash kumar Yadaw

Romance

पहला प्यार

पहला प्यार

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प्यार शब्द से नहीं था अनजान,

मगर किसी से नहीं हुआ था प्यार।


मगर जब उसे देखा पहली बार,

उसी पर दिल जान हो गया निसार।


भीड़ की शोर सन्नाटे में बदल गई,

दिल धड़कने लगा जोर जोर से।


उससे कुछ कहने से पहले ही,

हां हो गया था सब कुछ मेरी ओर से।


वो पास आकर मुझसे कुछ बोली,

मैं उसे ही देख रहा था एकदम गौर से।


आंखों ही आंखों में इजहार हो गया,

हम दोनों गुजरने लगे प्रेम के दौर से।


उसी की मन में ख्याल दिल में सवाल,

उसे देखते ही बदल गया मेरा हाल।


उसी के साथ वक्त बिताता था मैं,

उसे देखकर हो जाता था मैं निहाल।


हम दोनों साथ में ही रहते थे अक्सर,

एक दिन मैंने कर ही दिया इजहार।


वो पहले मुस्कुराई फिर शरमाई,

मगर मेरे प्रेम को कर ली स्वीकार।


इस तरह हमें हुआ एक दूजे से,

पहली ही नज़र में पहला प्यार।


दिल की खुशी को मत ही पूछो,

इसे मिल गया खुशियों की संसार।


फिर रिश्ते की बंधन में बंध गए,

बन गए एक दूजे के हम हमसफर।


जो ख्वाब दोनों मिलकर देखे थे,

हकीकत में सच हुआ हमारा सफर।


ख्वाब की हकीकत में ही रहने लगे,

करने लगे जिंदगी की हम बसर।


पहला प्यार ही हमारा सार्थक हुआ,

दिल में है एक दूजे के प्रेम का असर।



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