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शेख रहमत अली "बस्तवी"

Fantasy

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शेख रहमत अली "बस्तवी"

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पहला प्यार

पहला प्यार

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प्यार, मोहब्बत बैर नहीं है

अपने हैं हम गैर नहीं हैं, 

बात हक़ीकत मानो मेरी

भूल गए तो खैर नहीं है। 

संग में जीने मरने की

कसमें खाई हैं हमने, 

देखो साथ निभाने का

वादा किया है तुमने। 


शाम सुहाना है मस्ताना

हम तुम मिलकर गायें गाना, 

देख मोहब्बत हम दोनों की

दुनिया वाले हों दीवाना। 

शिद्दत की चाहत खुशियों की

रंग भरें जीवन में, 

देखो साथ निभाने का

वादा किया है तुमने। 


क्या?, भूल गए बीते लम्हों में

जान कहा करते थे तुम, 

पल-पल-हर पल इन होंठों से

नाम लिया करते थे तुम। 

जीते जी ख्वाहिश हो पूरी

या मर जाऊं संग में, 

देखो साथ निभाने का

वादा किया है तुमने। 



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