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Madhu Vashishta

Tragedy

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Madhu Vashishta

Tragedy

फिर एक निर्भया

फिर एक निर्भया

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बुझ गया किसी और घर का एक दिया।

बदलाव शायद कभी ना होगा। 

लड़कियों तुम भले ही दुर्गा ,

चंडी सी कठोरता अपना लो

लेकिन क्या फर्क पड़ेगा जब तक कुछ पुरुषों के मन में

कोमलता का संचार ना होगा।


रोंदना ही जब तक पुरुषत्व का पर्याय होगा।

प्रेम का पौधा कुछ पुरुषों को रोंपना ना आता होगा।

नहीं हो सकती निर्भया दामिनी जैसी लड़कियां सुरक्षित

जब तक पुरुष को रोना ही आता ना होगा। 



साहित्याला गुण द्या
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