पहेलियाँ
पहेलियाँ
पहेलियों से सुसज्जित हमारी ये दुनिया कितनी सजीली कितनी मनोहर है, कितनी सौंदर्य से परिपूर्ण है ,
जो प्रश्न सुलझ गए वो उत्तर बन गए, ना सुलझ पाए जो वे पहेली के नाम से मशहूर हो गए।
कुछ पहेलियों का उत्तर विस्मित कर जाता है तो कुछ में निहित ज्ञान, प्रकाश-पुंज मन में जगा जाता,
पहेलियों में बात करता इंसान बातों - बातों में अनगिनत सवाल मन के पन्नों पर अंकित कर जाता।
तो चलिए आज पहेलियों में पहेलियों की कुछ बातें करते हैं,
फिर से इनका लुत्फ उठाते हैं।
पहेलियाँ एक के बाद एक कुछ सुनी और कुछ अनसुनी सुलझाते हैं,
इस आनंद का लुत्फ़ उठाने के संग ज्ञान की ज्योत मन में जगाते हैं।
पहेली पहली अब पूछी जायेगी,
जिसके बाद अगली पहेलियों की बारी आएगी।
सापों से भरी एक पिटारी, सभी के मुँह में चिंगारी,
अक्लमंद कहलायेगा वो, बूझे जो पहली इस पहेली को हमारी।
माचिस का नाम तो सबने सुना होगा,
अब तक लगता हैँ किसी ने तो इसका उत्तर ढूंढ लिया होगा।
दूसरी पहेली में बूझो ऐसी चीज का नाम,
जागे रहने पर रहती ऊपर, सो जाने पर गिर जाएं धड़ाम।
जिनका उठना गज़ब ढाता है, गिरना अंधेरा फैला जाता,
दूसरी पहेली का उत्तर है पलकें जिनसे सबकी दुनिया में उजाला हो जाता।
अब बतलाओ ऐसी चीज का नाम जिसे प्यास लगने पे पी सकें,
भूखे हो तो खा सकें और ठण्ड लगने पे जला सकें?
दिमाग के घोड़े दौड़ाए होंगे तो पहचान तो अब तक गए ही होंगे,
नारियल से दूर अब तक आखिर कहाँ रह सके होंगे।
आखिरी पहेली करेगी बुद्धिमत्ता का फैसला,
कमर बांधे जो घर में रहती, हर वक़्त जिसकी जरूरत पड़ती, आखिर ऐसी चीज है क्या??
झाड़ ना पाए जो मन का तिमिर वो इस पहेली को सुलझा सकें होंगे कहाँ,
झाड़ू का नाम वो बूझ पाए होंगे कहाँ?
अनगिनत हैं ऐसे सवाल, हज़ारों हैं पहेलियाँ जो छोड़ती मन के परदे पर सवालिया निशान,
जीवन की इन पहेलियों से पृथक हों कर नहीं रह पाया आज तक कोई भी इंसान।
