STORYMIRROR

Indira Mishra

Tragedy

2  

Indira Mishra

Tragedy

पैरों से

पैरों से

1 min
137

पैरो से तुम्हारा गंगा निकली जमुना बनगयी सखी

सागर तुम्हारा आज्ञाकारी और ना लिख सकूंगी फिर,,,

जीवन बन गया शुष्क मृगतृष्णा ना मिला एक बूंद जल,,

कैसे लिखूंगी तुमहो सागर,,, करूणा सागर प्यार का सागर फिर,,,


आंखोँ से तुम्हारा चांद तारे निकले जगको देते रोशनी,,,

अंधकार की अन्धेरी में बैठी रोशनी मिलेगी नहीं,,,,

जला दो जला दो दिलों मेँ ज्ञान का रोशनी मिटेगा अंधेरा मिलेगा सब को ग्ज्ञान्ं,,, 

लिखूंगी तुमहो करूणा सागर प्यार का सागर फिर,,,



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy