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Indira Mishra

Tragedy


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Indira Mishra

Tragedy


कोरोना

कोरोना

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हम प्यार मुहब्त जताने के लिये गले

लग जाते हैं अपने रिस्ते नाते से

अब कैसा वक़्त आ गया एक दूसरे से भाग जाते ते हैं।


अगर कोई बीमार है उस्से मिलना तो दूर

प्यार से सिमटना तो दूर सरकार तूरंत दूर करदेता है उस्से अपनो से

कोरोना के नाम से अपनो से कोई दूर जहाँ अपने मिलने ना आते

अन्तिम संस्कार सबदाह सम्म्सनंघाट में आस नामिल पाती


डर दर्दनाक कितना बेरहमी से दूर होजाते है अपनों से

अपने बच्चों से क्यूंकि जिन्दगी और मौत का सवाल

अपनो को बचाने के लिए अपनो से दूर होजाते हैं


और सारा सहर सन्नाटे में खोजाता है ।

अपने घरौं मेँ सबसे दूर रहकर

ना कोई इछा ना कोई तमन्ना हस्पताल भरा हुआ है मरीजों में

पडे हुए लोग रास्ते मेँ

सम्म्सनंघाट में


घूम रहै हैं भगवान सफ्फेद कपड़ो में फिर भी

बचा नहीं पाते मौत से तक्दोर से

उपहास कररही है जिन्दगी

जिन्दगी और मोत्त का खेल


धनी और गरीब के बीच चल रही है

युद्घ महामारी संक्रमण्ं कि

बीमारी करोन्ना कि

करोन्ना कि युद्घ

दौलत ना बचापायेगा


सुंन्यो सहर सुंन्यो घर सुंन्यो हृदय

खालीपन जिन्दगी और मौत कि लडाई

जो जीता वोही सिकंदर

सांस रुक्जति

खुन कि प्र्बाह थम जाती

हृदय ना चलती

कैसा सन्नाटा चारों तरफ

हर बस्ती हर गली हर घर में कोई संक्रमित्त है


भयभित है करोन्ना से कीटाणु से

लढना है मौत से

योध्दा बनकर लढना हिम्मत है मन मेँ


अगर मरगये तो भी परवा नहीं

भगवान से कोई सिकायत भी नहीं

अपनो को बचाना है

अपनो से दूर रहो अपनो ने सजदिये


संक्रमण से गले लगाने से

मुहबत जताने से

सायद सजा है भगवान का इंसान पर

अपनो से दूर रहो

अगर मुहबत है अपनो से तो दूर रहो

ये ही जिन्दगी है ये ही सचाई है

आये थे खाली हाथ जायेंगे खाली हाथ

कुछ ना ले जायेंगें।


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