Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

निशा परमार

Abstract Drama Crime

4.5  

निशा परमार

Abstract Drama Crime

पाखंड पुजता

पाखंड पुजता

1 min
471


जान की कीमत नहीं है 

कीमत है माल की 

बीच चौराहों पर लगती 

नुमाइशें बेईमानी की


झंडे गढ़ते झूठ के

और धज्जी उड़ती सत्य की

पाखंड पुजता समाज में

ईमान बिकता कौड़ियों के भाव में

धुँध छाई है अन्धविश्वास की

मर गई है चेतना 

जय जय कार होती 

हैवानों की 


खाक हो गई नैतिकता

रौंध दी गई मानवता

तलवार लटकी अधर्म की 

अर्थी उठती धर्म की 

कहीं आतंक की ज्वाला भड़कती  

कहीं दंगों की चिंगारियां 

रक्त रंजित छींटों से 

रँगती सूरत कुकर्म की


दफ़न हो गया न्याय 

लालच की नींव में

हूंकार भरता अन्याय 

अपराध की जीत में 

कपट के ललाट पर लगी 

तिलक रोली अहम की 


जान की कीमत नहीं 

कीमत है माल की 

बीच चौराहों पर लगती 

नुमाइशें बेईमानी की 

 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract