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कपट के ललाट पर लगी तिलक रोली अहम की कपट के ललाट पर लगी तिलक रोली अहम की
दिल और दिमाग ने कराहते सन्नाटों के ह्रदय में भूचाल देखें है दिल और दिमाग ने कराहते सन्नाटों के ह्रदय में भूचाल देखें है
शीतल झरना सा दो आत्माओं के संगम पर.... शीतल झरना सा दो आत्माओं के संगम पर....
जिनके झरोखे की कोरों से सरकते कुछ ख़्वाब अटक जाते हैं जिनके झरोखे की कोरों से सरकते कुछ ख़्वाब अटक जाते हैं
नैनों के किनारे किनारे जहाँ से बहता हुआ हया का झोंका झाँक रहा था ! नैनों के किनारे किनारे जहाँ से बहता हुआ हया का झोंका झाँक रहा था !
इसी उधेड बुन में कि चंद सिक्कों को कहाँ खर्च करुँ दवा पर या भूख पर। इसी उधेड बुन में कि चंद सिक्कों को कहाँ खर्च करुँ दवा पर या ...
आँखों के समुंदर के किनारों की भीनी माटी में सपने सींचते थे चेतन अंकुरण को! आँखों के समुंदर के किनारों की भीनी माटी में सपने सींचते थे चेतन अंकुरण को!
स्वयं की खोज करता स्वयं का अंश ! स्वयं की खोज करता स्वयं का अंश !
जगत में होते कुकृत्य को देखती मानवता आँखें मीचे। जगत में होते कुकृत्य को देखती मानवता आँखें मीचे।
झपटकर पड़ती है दाँत गढ़ाती अपने अहम के और निशान छोड़ जाती है अमानवीयता के। झपटकर पड़ती है दाँत गढ़ाती अपने अहम के और निशान छोड़ जाती है अमानवीयता...