STORYMIRROR

minni mishra

Tragedy Inspirational

4  

minni mishra

Tragedy Inspirational

ओ माँ!

ओ माँ!

1 min
370

लेखनी की स्याह से

 शब्द पिरो रही हूँ ।

अधजले कागज पर ,

भावनाएं उकेर रही हूँ ।


 कोख को निचोड़कर 

  तूने कचरे में 

 क्यों फेंक दिया ?

  क्या कसूर था मेरा, 

जो ...मौत के मुँह में धकेल दिया ?


कैसी जननी हो ?

किस-किस से डर रही हो?

अपनों से.. या ...

अपनी उस परम्परा से ?


जो स्वर्ग नरक का

 द्वार दिखाती... 

  बेटा-बेटी में  

भेद सिखाती ? 


 कभी ...कंस भी ,

बेटी की हत्या से थर्राया था।

रावण भी ... 

सीता-हरण से घबराया था।


 माँ तुझे भी, 

हत्या का पाप लगेगा !

  मेरे खोने का  

पश्चाताप रहेगा i


 मैं ..सती,

सावित्री और सीता बनूँगी।  

 गार्गी, मैत्रयी और 

 इंदिरा दिखूँगी। 


 एक बार....बस

 एक बा....र मुझे आने दे ! 

 माँ...अपनी बांहों में

 मुझे सोने दे !



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy