STORYMIRROR

नज़र आता है

नज़र आता है

1 min
14.8K


छिपे रहे अब यूँ ही

पन्नो के पीछे की

पड़ी जिंदगी खुद में

किताब नज़र आती है।


एक ये ही तूफान है या

एक वो ही तूफान था कि

आईना धुल गया कब का

पर अब जा के ये चेहरा

आईना नज़र आता है।


याद आ ही जाती है बीती जिंदगी

और सब कुछ फिर वैसा हो जाता है

ना जाने किस्से का कौन सा हिस्सा छुटा

कि जीवन खुद में किस्सा नज़र आता है।


फिर खुश क्यों ना होती हूँ मैं

अपना तमाशा देखकर

बस जिए जा रही हूँ

वो जीवन जो नरक से भी

बत्तर नज़र आता है।


साहित्याला गुण द्या
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy