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SUNIL JI GARG

Romance

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SUNIL JI GARG

Romance

नज़दीकियां सारी मैं हूँ

नज़दीकियां सारी मैं हूँ

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साथ चलती हो तो साथ बैठा भी करो,

प्यार से साथ रहना लगता है अच्छा ।

साथ रहने से उपजी लड़ाई हुई अब कल की बात,

झूठ अब झूठ न रहा हो चुका है सच्चा ।।


तुम जब उबलती हो तब भी, शांत होती हो तब भी,

लगता है, वजह हर अदा की तुम्हारी मैं हूँ ।

वैसे मैं ही हूँ पक्का तुमसे ज़्यादा ड्रामेबाज़ ।

जानेगा न तुमको कोई और, क्योंकि नज़दीकियां सारी मैं हूँ ।


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