नज़दीकियां सारी मैं हूँ
नज़दीकियां सारी मैं हूँ
साथ चलती हो तो साथ बैठा भी करो,
प्यार से साथ रहना लगता है अच्छा ।
साथ रहने से उपजी लड़ाई हुई अब कल की बात,
झूठ अब झूठ न रहा हो चुका है सच्चा ।।
तुम जब उबलती हो तब भी, शांत होती हो तब भी,
लगता है, वजह हर अदा की तुम्हारी मैं हूँ ।
वैसे मैं ही हूँ पक्का तुमसे ज़्यादा ड्रामेबाज़ ।
जानेगा न तुमको कोई और, क्योंकि नज़दीकियां सारी मैं हूँ ।

