नयी राह
नयी राह
एक नए किरदार में शुरुआत है मेरा,
ज़िंदगी में एक ख़्वाहिश थी जो
खुद के सहारे संवारने ये चलना मेरा,
इन शब्दों संग मोहब्बत में पनपना है मुझे,
बस खुदसे खुदको साबित करना है मुझे,
क्यूँ हम सहारे को तरसे कंधा झुकाए हार जाते हैं?
क्यूँ हम दूसरों के पुष्टि,
अपनो की संतुष्टि पे खुद को तोलते हैं ?
इसी घिसापिटा सोच से खुद को अलग बनाने की चाहत हो,
बिना काबिलियत किसी सहारा और सराहना की उम्मीद ना हो,
लोगों की सोच को ग़लत साबित करना इरादा नहीं,
ना शिकायत ना शिकवा बस खुदको परखना ना है यूँ ही
चलना है इस नए किरदार में
उम्मीद यही की निखार के बेहतरीन बनूँ
परखी जाऊँ फिर भी बिखर ना जाऊँ,
ये शब्दों संग राह में में बस में रहूँ।
