STORYMIRROR

PrajnaParamita Aparajita

Abstract

3  

PrajnaParamita Aparajita

Abstract

ए ज़िंदगी....

ए ज़िंदगी....

1 min
296

सिरहाने तेरी ही किताब छुपाए हर रात बीतती है मेरी

बिस्तर की सिलवटें तेरी रूबरू रहने की गवाही है मेरी

हर रात ए ज़िंदगी तेरे ही सपने यादों में बेरुख़ी तेरी

मोहब्बत इतनी शायद हो किसी से मेरी

सुबह को मुलाक़ात मुमकिन भी शायद ना हो

फिर भी शुक्राना तेरा दिल से है ए ज़िंदगी..

हर ख़ुशी, हर हँसी, हर मरहम का शुक्रिया,

हर आंसू , हर दर्द, हर वो ज़ख़्म का शुक्रिया,

मुझमें तेरी तलब का शुक्रिया,

कल मिले ना मिले पर हर पल मेरी बने रहने का शुक्रिया

तू है तो में हूँ..... तुझसे है वजूद मेरी।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract