Chandra prabha Kumar
Fantasy
निवेदन
स्थिर हो जाओ,
समय रुक जाओ,
ऐसी भी क्या जल्दी है,
ज़रा ठहर सुस्ताने दो।
तुम क्या हो,
क्या मुझे न बताओगे ,
आते हो तो चले क्यों जाते हो ,
क्या मुझे न समझाओगे।
हाइकु
सूरज
चेतना विस्तार
श्रीप्रभु के ...
आ बरसो मेघा
आज रक्षाबन्धन
जन जन का प्या...
अमृत महोत्सव
प्रिय मेरा
ऑंवले का वृक्...
निगाहों को कहींआस का नज़ारा नहीं मिलता जैसे नदी के एक किनारे को कभी दूसरा किनारा नहीं निगाहों को कहींआस का नज़ारा नहीं मिलता जैसे नदी के एक किनारे को कभी दूसरा किनारा...
बेरंग होती धरती बेनूर प्रकृति के रंग बेरंग होती धरती बेनूर प्रकृति के रंग
बस यही करना चाहता हूँ। संग तेरे जीना संग मरना चाहता हूँ। बस यही करना चाहता हूँ। संग तेरे जीना संग मरना चाहता हूँ।
मेरा हमसफर, जीवन के हर सफर में मेरे साथ रहे। मेरा हमसफर, जीवन के हर सफर में मेरे साथ रहे।
उस पर जरा देखो इसकी गहराई को दिखता नहीं नयनों को खुद की परछाई लो। उस पर जरा देखो इसकी गहराई को दिखता नहीं नयनों को खुद की परछाई लो।
पर कलेजा तो तब कसा जब ज़िंदगी नासूर बना, आँसू भी पोंछने आ गए तुम। पर कलेजा तो तब कसा जब ज़िंदगी नासूर बना, आँसू भी पोंछने आ गए तुम।
उसके बेइंतहा प्यार ने ही तो आज मजबूर किया है मुझे, चंद शब्द उसकी तारीफ में बयान करने क उसके बेइंतहा प्यार ने ही तो आज मजबूर किया है मुझे, चंद शब्द उसकी तारीफ में बय...
पता चला पन्नों से निकल तू फिर पन्नों में सिमट गया। पता चला पन्नों से निकल तू फिर पन्नों में सिमट गया।
प्यार भरी बस एक नजर पर डाल दो मुझ पर यार। प्यार भरी बस एक नजर पर डाल दो मुझ पर यार।
ऐसे सभी को लगता है इसे कोई दर्द ही नहीं होता। ऐसे सभी को लगता है इसे कोई दर्द ही नहीं होता।
स्मरण करें मरणोपरांत तो सब श्रृंगार। स्मरण करें मरणोपरांत तो सब श्रृंगार।
लफ्जों को जोड़ने तोड़ने लगी लफ्जों को जोड़ने तोड़ने लगी
वैसे ही तो है जाना फिर क्यों लिखना लिखते जाना। वैसे ही तो है जाना फिर क्यों लिखना लिखते जाना।
दिल खामोश है मगर पसरी वीरानी सी। दिल खामोश है मगर पसरी वीरानी सी।
मिला लेना उसे खुद में और भर देना खुशियों के मोती उसके दामन में। मिला लेना उसे खुद में और भर देना खुशियों के मोती उसके दामन में।
नाचीज़ की निगाहें उस माहताब से टकरा गई तकनीकें इश्क़ की हर कायदा बता गई। नाचीज़ की निगाहें उस माहताब से टकरा गई तकनीकें इश्क़ की हर कायदा बता गई।
दफ़न हैं हजारों अनकही कहानी, अलग है कठिन हैं ये जिंदगानी दफ़न हैं हजारों अनकही कहानी, अलग है कठिन हैं ये जिंदगानी
प्रेमी से मिलने निकली अभिसारिका सी, सागर पर न्यौछावर हो जाती है। प्रेमी से मिलने निकली अभिसारिका सी, सागर पर न्यौछावर हो जाती है।
उम्र उतरती है जब चेहरे पर यादों की कितनी परतें खोल देती है। उम्र उतरती है जब चेहरे पर यादों की कितनी परतें खोल देती है।
उन बचपन की पुरानी पन्नों को दुबारा पलटाने में। उन बचपन की पुरानी पन्नों को दुबारा पलटाने में।