Chandra prabha Kumar
Fantasy
निवेदन
स्थिर हो जाओ,
समय रुक जाओ,
ऐसी भी क्या जल्दी है,
ज़रा ठहर सुस्ताने दो।
तुम क्या हो,
क्या मुझे न बताओगे ,
आते हो तो चले क्यों जाते हो ,
क्या मुझे न समझाओगे।
हाइकु
सूरज
चेतना विस्तार
श्रीप्रभु के ...
आ बरसो मेघा
आज रक्षाबन्धन
जन जन का प्या...
अमृत महोत्सव
प्रिय मेरा
ऑंवले का वृक्...
फिर से दोस्तों के साथ गलियों में दौड़ लगाएं फिर से दोस्तों के साथ गलियों में दौड़ लगाएं
अंधेरे क्या प्रभात को रोक पाते हैं खुशियों के मंजर लौटकर जल्द जाते हैं। अंधेरे क्या प्रभात को रोक पाते हैं खुशियों के मंजर लौटकर जल्द जाते हैं।
एक वक्त पर आशिक और मवाली थे। तो क्या कहीं आज भी जिंदा हो तुम। एक वक्त पर आशिक और मवाली थे। तो क्या कहीं आज भी जिंदा हो तुम।
उसने कविताओं में कहा था प्यार किसी एक से करना चाहिए उसने कविताओं में कहा था प्यार किसी एक से करना चाहिए
सारे ज़माने की नजर रहती है हर लम्हाए चांद तुझ पर पहरेदारी बहुत है। सारे ज़माने की नजर रहती है हर लम्हाए चांद तुझ पर पहरेदारी बहुत है।
यशोदा मैया, दाउ भैया, राधा -रानी प्राणों से भी प्यारी हैं। यशोदा मैया, दाउ भैया, राधा -रानी प्राणों से भी प्यारी हैं।
उठकर देखा मैंने कहीं दुनिया सच में तो नहीं बदल गई। उठकर देखा मैंने कहीं दुनिया सच में तो नहीं बदल गई।
क्योंकि बताना है उन्हें वही, जो अब तक छुपाया है सबसे। क्योंकि बताना है उन्हें वही, जो अब तक छुपाया है सबसे।
तब तुम मुझे बुलाओगी, मगर मैं नहीं आऊंगा, ज़ब मैं छोड़कर तुम्हें चला जाऊँगा ! तब तुम मुझे बुलाओगी, मगर मैं नहीं आऊंगा, ज़ब मैं छोड़कर तुम्हें चला जा...
जीने दो कुछ पल तुम्हारे साथ आखिर यही चार दिनों का किस्सा है। जीने दो कुछ पल तुम्हारे साथ आखिर यही चार दिनों का किस्सा है।
सिकुड़ जाएंगे सारे वृक्ष, अनाथ हो जाएंगे जंगल, सिकुड़ जाएंगे सारे वृक्ष, अनाथ हो जाएंगे जंगल,
मैं कभी-कभी क्या आपको भी ऐसा ही ख्याल आता है कभी ! मैं कभी-कभी क्या आपको भी ऐसा ही ख्याल आता है कभी !
हां ! हां मैं आंसू हूं, बस मेरी यही कहानी है। हां ! हां मैं आंसू हूं, बस मेरी यही कहानी है।
न कोई यहां किसी को अब कभी स्वीकार है मुझे तो ज़िन्दगी से आज भी वही प्यार है। न कोई यहां किसी को अब कभी स्वीकार है मुझे तो ज़िन्दगी से आज भी वही प्यार है।
सारे पन्ने कोरे थे ! क्यूँ मिलता हैं, इतना गम किसी को दिल से, चाहने से ! सारे पन्ने कोरे थे ! क्यूँ मिलता हैं, इतना गम किसी को दिल से, चाहने स...
कभी गिर कर संभल के जीवन चलती है कभी गिर कर संभल के जीवन चलती है
गल्तियों सें बेपनाह मोहबत्त इस तरह हो जाये राहे जिंदगी की भुलके भी एक सुकून सा पाये। गल्तियों सें बेपनाह मोहबत्त इस तरह हो जाये राहे जिंदगी की भुलके भी एक सुकून स...
कैसे बिताऊँ ये बे-सब्री की घड़ियाँ एक-एक दिन बराबर है कई-कई बरस के कैसे बिताऊँ ये बे-सब्री की घड़ियाँ एक-एक दिन बराबर है कई-कई बरस के
दो समान्तर रेखाएं मिलती हैं अनंत पर कहीं। दो समान्तर रेखाएं मिलती हैं अनंत पर कहीं।
प्यास.... बाहर नहीं। तुझे तेरे भीतर ही मिलेगी। प्यास.... बाहर नहीं। तुझे तेरे भीतर ही मिलेगी।