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Suraj Kumar Sahu

Abstract

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Suraj Kumar Sahu

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नील मुक्तक

नील मुक्तक

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वो हैं नही जो होने का वो दावा करते हैं, 

अब इश्क़ में भी खूब लोग मिलावा करते हैं, 

जो न समझ सके हमारे दिल के भाव को, 

वो क्या होंगे अपने सिर्फ दिखावा करते हैं


जब सवाल होगें तो न देने जवाब आऐंगे, 

न बुरा समय में काम देनें नवाब आऐंगे, 

अपनी लंगोट खुद सम्भल कर चलना, 

 चारों तरफ से ऐसा वरना दवाब आऐंगे


इस तरफ से उस तरफ पेशा है उनका, 

जिस्म उनकी जान भी बेचा हैं उनका, 

गलत जो कह के सच को दुश्मन हो गए, 

झूठ ही कहना था झूठ अच्छा हैं उनका।


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