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Suraj Kumar Sahu

Romance

4  

Suraj Kumar Sahu

Romance

नील गजल

नील गजल

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तेरे करीब रहते इतने इंतजाम हो गये, 

दोनों की मुहब्बत के चर्चें आम हो गये। 


वर्षों के दबी खमोशी निकालने में जनाब, 

कितने सुबह गुजरे कितने शाम हो गये। 


कभी दिल की बात कहा कभी सुना तेरी, 

आँखों की गहराई मयखाने के जाम हो गये। 


तुम्ही से आराम तुम्हीं से शुकुन दिल को, 

मिलते ही मेरे दुख दर्द के लगाम हो गये। 


पहले तो मेरे जीने की कोई वजह थी नही, 

सच कहुँ तो आप आखिरी मुकाम हो गये। 


मुहब्बत में दुश्मनों की कमी कहाँ नील को, 

पाया साथ तेरा जलकर राख तमाम हो गये। 



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