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Neetu Tyagi

Inspirational

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Neetu Tyagi

Inspirational

नहीं चाहिए बचपन

नहीं चाहिए बचपन

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मैंने छोड़ दिया बचपन को 

नहीं चाहिए इस दुनिया को 

मेरा बचपन वाला अपनापन 

चलता रहता दिन रात यहां विश्व मंथन 

अमृत नहीं चाहिए इनको

 करते रहते विष वमन

 मैं तो अपने प्रश्न स्वयं उठाती

 स्वयं ही उत्तर भी दे लेती

 सागर की लहरें भी उठती

 और स्वयं सिमटती हैं

 मुश्किल है पर मन की गांठे

 स्वयं खोलनी पड़ती हैं 

तन मन की पीड़ा भी स्वयं 

समझ नी पड़ती है


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