Sushant Kushwaha
Tragedy
नदी निरंतर बहती हो
किसी से कुछ न कहती हो
मन में विकार लिए
क्यों अन्याय तुम सहती हो
अवसाद तुम्हारे अंदर भरता
फिर तुम चुप क्यों रहती हो
अपनी वेदना मुखर होकर
अज्ञानी से क्यों ना कहती हो!
तेरी सौगात हो...
किधर जाएँ
बड़ा अंधेरा है
कलयुग
आना चाहिए
प्यार
जिंदगी
नदी
दोस्ती
बचपन
वो खार रहा सिर्फ खार... और एक कमतरी का एहसास...! वो खार रहा सिर्फ खार... और एक कमतरी का एहसास...!
लो अग्नि संस्कार किया स्त्री विमर्श में अपने हाथों से लिखें पृष्ठों का। लो अग्नि संस्कार किया स्त्री विमर्श में अपने हाथों से लिखें पृष्ठों का।
नदी जब भी नदी से मिलती है ये कहती है हो गया पूरा मिलन धार एक हो कर बहती है। नदी जब भी नदी से मिलती है ये कहती है हो गया पूरा मिलन धार एक हो कर बहती है।
वो सुबह कुछ अलग सी थी कुछ धुआं रेत बारीक सी थी। वो सुबह कुछ अलग सी थी कुछ धुआं रेत बारीक सी थी।
कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था। कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था।
राजनीति सुविधा हुई ,बनी आज व्यवसाय। मीठा-मीठा गप्प सब, कड़वा थूकत भाय।1। राजनीति सुविधा हुई ,बनी आज व्यवसाय। मीठा-मीठा गप्प सब, कड़वा थूकत भाय।1।
वक्त निकलता जा रहा कैसी बेतहाशा ये दौड़ है। वक्त निकलता जा रहा कैसी बेतहाशा ये दौड़ है।
गाँव की गलियों से जब जब गुजरा हूँ मैं पथ की बेरियों को उकेरा है मैंने। गाँव की गलियों से जब जब गुजरा हूँ मैं पथ की बेरियों को उकेरा है मैंने।
जिंदगी में भरी निराशाओं में एक नई आशा का उजाला दिखा तो था। जिंदगी में भरी निराशाओं में एक नई आशा का उजाला दिखा तो था।
ढह रही भरोसे की कच्ची दीवारें, क्यूँ कि बुनियाद ही शक पर बनी थी। ढह रही भरोसे की कच्ची दीवारें, क्यूँ कि बुनियाद ही शक पर बनी थी।
दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर। दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर।
और कर रहे हैं शर्मिंदा सच को, झूठ के झुंड में। और कर रहे हैं शर्मिंदा सच को, झूठ के झुंड में।
प्रकृति करीब जाओ जितने अपनी ओर खींचने को आतुर। प्रकृति करीब जाओ जितने अपनी ओर खींचने को आतुर।
पराई भाषा को दिया मान,, अपनी भाषा को माना कूड़ेदान। पराई भाषा को दिया मान,, अपनी भाषा को माना कूड़ेदान।
तुम बस अपनी सोचो यहां। खुदा किसी का भी ना मोहताज है तुम बस अपनी सोचो यहां। खुदा किसी का भी ना मोहताज है
जीवन इतना सरल नहीं जीवन इतना सरल नहीं
मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है
टूट गई मन की गागरिया टुकड़े झोली भरती। रंगहीन ले...य़ टूट गई मन की गागरिया टुकड़े झोली भरती। रंगहीन ले...य़
आज फिर तेरे तसव्वुर ने नींद को इन आँखों से रूख़्स्त किया है। आज फिर तेरे तसव्वुर ने नींद को इन आँखों से रूख़्स्त किया है।
किन्तु, ख़ुद ख़त्म होने से पहले ही, पहुँच में उसके दूसरी कुर्सी। किन्तु, ख़ुद ख़त्म होने से पहले ही, पहुँच में उसके दूसरी कुर्सी।