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Goldi Mishra

Drama

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Goldi Mishra

Drama

नौका और मझदार

नौका और मझदार

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शिकायतें बहुत है,

ना खबर हमें की जाना किस ओर है,

एहसास को शब्दों में कैसे ज़ाहिर करूँ,

कोरे पन्नों की ख़ामोशी मैं कैसे तोड़ दूँ,

मायूसी से भरी इन राहों में घुंघरू पहन मैं झूम लूँ,

ये किस्सा जो अनछुआ है इसे कैसे भरी महफ़िल में सुना दूँ।।

शिकायतें बहुत है,

ना खबर हमें की जाना किस ओर है,


हज़ारों सवालों के जवाब मैं कैसे दूंगी,

सब पूछेंगे ख़ामोशी की वजह मैं तब क्या कहूंगी,

दास्तां की शुरूआत आखिर मैं कहा से करूंगी,

पहले ज़िक्र तेरा करूंगी फिर हाल अपना बयान करूंगी।।

शिकायतें बहुत है,

ना खबर हमें की जाना किस ओर है,


काश कोई कर दे शुरू महफ़िल में ज़िक्र तुम्हारा,

बस इत्मीनान से पढ़े कोई सीरत का आईना,

आंखों के पैमाने पर कई पन्ने बिखरे है,

कुछ आशियाने बिखरे तो कुछ ठिकाने संवरे है।।

शिकायतें बहुत है,

ना खबर हमें की जाना किस ओर है,

मेरी दरख्वास्त भी खारिज ही गई,

सिफारिशों के खतों कि भी वापसी हो गई,

आस की शमा भी बुझ कर राख हो गई,

ख्वाहिशों के समंदर में मेरी उम्मीद की नाव तबाह हो गई,।।



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