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Nirdosh Jain

Classics

4  

Nirdosh Jain

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नारी

नारी

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नारी से ही हित है, नारी में ही मीत 

   नारी में ही देख लो, जीवन का संगीत। 


   तीन लोक में नारी का है प्रथम स्थान 

   नारी का सम्मान करो, इसी में है कल्याण। 


   नारी पर श्रद्धा धरो, सदा करो अभिमान 

   चाहे तो स्वर्ग बना दे घर, चाहे श्मशान। 


   सृष्टि का आधार है, घर घर की है शान 

    जीवन का ये सार है, नारी रूप महान। 


  नारी का दुनियाँ में, सदा प्रथम स्थान 

   माँ की पूजा करो, वो साक्षात भगवान। 


  नारी में ही देखिए ' निज आत्म स्वरूप 

  नारी ही माँ काली, दुर्गा लक्ष्मी का रूप। 


  नारी से सम्मान है, नारी से अभिमान 

  नारी में ही जानिए, सभी गुणों की खान। 


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