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V. Aaradhyaa

Action Classics Inspirational

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V. Aaradhyaa

Action Classics Inspirational

नारी घर की धूरी कहलाती है

नारी घर की धूरी कहलाती है

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स्त्री ममतामयी है और बेहद करूणामयी है,

वह दयामयी है और उसमें सहनशीलता है !

वह जन्मदातात्री है और वह पालनकर्ता है,

संतान का मार्गप्रशस्त करनेवाली मार्गदर्शिका है !


स्त्री ही जीवन कि तारण हारणी भय हरिणी ,

एक नारी के नारीत्व कि रक्षक बन कर खड़ी है !

स्त्री की शक्ति के आगे संसार पूरा झूका हुआ ,

भव सागर से पार कराए यह बात बहुत बड़ी है !


ना थी कभी कमजोर,ना था लोक लाज का भय,

निरंतर प्रगति पथ पर अग्रसर नारी का हुआ उदय !

स्त्री की विवेचना करने वाले का सिर झुक जाए ,

 आज नज़ारा ऐसा सारा जग हुआ आज स्त्रीमय !


तेरी गर्जना शक्ति से तीनों लोक कपकपाये थे...!

तेरे नारित्व का उजाला, देख मैदान छोड़ भागे थे..!!

जनमानस के बीच पहुँच कर तूने तरक्की पाई है..!

अलग छवि बनाने बाली ,तू जगदम्बा कहलाई है..!!


तू ही काली,तू ही अंबे मां,तू ज्वाला माई है..!

तू ही पाताल बासनी, तू ही पहाड़ा वाली माई है..!!

तू ही चिंतपूर्णी माई, तू ही मां अन्नपूर्णा माई है..!

तू ही आदिशक्ति माँ गौरी,तू ही सिध्दीदात्री माई है..!!


तू सबके हृदय में समाकर तूने दिया सहारा है,

रूप तेरे अनेक है मैया,धरती मैया को थामें है..!!

हर रिश्तों कि बुनियाद तुमसे बनी यहां माई है..!

सबको एक डोरी में बांध घर की धुरी कहलाती हो..!!


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